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पंडरिया विधानसभा: दावों की खुली पोल! खेल मैदान बचाने सड़क पर उतरे मलकछरा के ग्रामीण, विधायक बोहरा के ‘विकास मॉडल’ पर उठाए गंभीर सवाल

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विकास मॉडल’ की खुली पोल: खेल मैदान बचाने सड़क पर उतरे मलकछरा के ग्रामीण!
जब बच्चों का खेल मैदान ही सुरक्षित नहीं, तो कैसा विकास?” – ग्रामीणों का तीखा सवाल


पंडरिया। पंडरिया विधानसभा में विकास के बड़े-बड़े दावों और मंचों से बरसते भाषणों की जमीनी हकीकत अब खुलकर सामने आ गई है। ग्राम पंचायत मलकछरा में बच्चों के भविष्य और खेल संस्कृति पर भू-माफियाओं का ग्रहण लग चुका है। वर्षों पुराने सार्वजनिक कबड्डी खेल मैदान पर हुए अवैध कब्जे को लेकर ग्रामीणों और खिलाड़ियों का आक्रोश फूट पड़ा है। न्याय की आस में पिछले दो वर्षों से भटक रहे ग्रामीणों ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।
20 साल का गौरवशाली इतिहास, आज प्रशासन की उदासीनता का शिकार
यह कोई आम जमीन नहीं, बल्कि मलकछरा के ग्रामीणों की भावना और पहचान है।
बिना सरकारी मदद के निर्माण: इस मैदान को स्थानीय ग्रामीणों ने खुद पसीना बहाकर तैयार किया है।
20 वर्षों से आयोजन: यहाँ ग्रामीण आपसी चंदे से पिछले दो दशकों से राज्यस्तरीय और जिला स्तरीय कबड्डी प्रतियोगिताएं आयोजित कराते आ रहे हैं।
प्रशासनिक मौन: शासन-प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण आज इस ऐतिहासिक मैदान का अस्तित्व खतरे में है।
“अनेक बार लिखित शिकायतों और गुहार के बावजूद प्रशासन कुंभकर्णी नींद सोया रहा। जब पानी सिर से ऊपर चला गया, तो हमें सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा।”
— आक्रोशित ग्रामीण


जनसेवक आनंद सिंह ने संभाला मोर्चा, SDM दफ्तर में दी चेतावनी
ग्रामीणों के सब्र का बांध टूटने के बाद, जनसेवक आनंद सिंह के नेतृत्व में भारी संख्या में ग्रामीण पंडरिया अनुविभागीय कार्यालय (SDM) पहुंचे। ग्रामीणों की पीड़ा को गंभीरता से लेते हुए आनंद सिंह ने तत्काल अधिकारियों से मुलाकात की और निष्पक्ष जांच कर 24 घंटे के भीतर अतिक्रमण हटाने की मांग की।
सत्ता और प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए आनंद सिंह ने कहा:
“एक तरफ सत्ता पक्ष विकास के ढोल-नगाड़े पीट रहा है, तो दूसरी तरफ बच्चों के खेलने की जमीन तक सुरक्षित नहीं है। अगर बच्चों के भविष्य पर डाका पड़ेगा और प्रशासन मौन रहेगा, तो यह जनता के अधिकारों की हत्या है। गांव की सार्वजनिक भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो उग्र जनआंदोलन होगा।”
ग्रामीणों की मुख्य मांगें (आर-पार की जंग):
🛑 तत्काल कार्रवाई: कबड्डी मैदान से अवैध अतिक्रमण को तुरंत जमींदोज किया जाए।
⚖️ कड़ी कार्रवाई: सार्वजनिक जमीन पर कब्जा करने वाले दोषियों पर निष्पक्ष और सख्त कानूनी कार्रवाई हो।
📜 सुरक्षित घोषणा: इस मैदान को शासकीय रिकॉर्ड में स्थायी रूप से ‘खेल मैदान’ घोषित कर सुरक्षित किया जाए।
🛡️ भविष्य की सुरक्षा: प्रशासन गांव की अन्य सार्वजनिक भूमियों को बचाने के लिए ठोस नीति बनाए।
“जनहित और ग्रामीण अधिकारों की यह लड़ाई अब थमने वाली नहीं है… जब तक न्याय नहीं मिलेगा, संघर्ष जारी रहेगा!”

मुकेश अवस्थी

प्रधान संपादक

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