संस्कारों की महक: स्कूली बच्चों ने आनंद मेले की कमाई से की मानवता की सेवा का संकल्प

कवर्धा। आज के भौतिकवादी युग में जहाँ किशोर पीढ़ी मोबाइल और तकनीक की दुनिया में खोई रहती है, वहीं कवर्धा के अशोका पब्लिक स्कूल के तीन विद्यार्थियों ने परोपकार की एक अनूठी मिसाल पेश की है। विद्यालय के छात्र कुंजल राणा(10 वीं), नववीर प्रताप राणा एवं नवतेज प्रताप राणा(कक्षा 3) ने अपने स्वर्गीय दादा डॉ. टी.आर. राणा के सेवाभावी आदर्शों पर चलते हुए अपनी मेहनत की कमाई को जरूरतमंदों के नाम कर दिया।
दादाजी की सीख और दादी का मार्गदर्शन
मिली जानकारी के अनुसार, इन तीनों भाई-बहनों ने अपनी दादी श्रीमती बसंती राणा से अपने स्वर्गीय दादाजी द्वारा किए गए जनहित के कार्यों की कहानियाँ सुनी थीं। इसी प्रेरणा के वशीभूत होकर उन्होंने निर्णय लिया कि वे विद्यालय के वार्षिक उत्सव व ‘आनंद मेला’ में अपने स्टॉल से होने वाली आय को व्यक्तिगत उपयोग में लाने के बजाय समाज सेवा में लगाएंगे।
जरूरतमंदों के बीच खुशियों का वितरण होगा
24 दिसंबर को आयोजित कार्यक्रम के बाद, बच्चों ने अपनी स्टॉल की कमाई से:
ग्रामीण क्षेत्र के निर्धन बच्चों को कॉपी और पेन का वितरण करेंगे।
जिला अस्पताल कवर्धा में भर्ती मरीजों को उनकी आवश्यकता अनुसार राहत सामग्री प्रदान करेंगे।

पद्मश्री डॉ. अजय कुमार मंडावी ने थपथपाई पीठ
इस नेक पहल की गूंज विद्यालय परिसर से बाहर तक पहुँची। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ. अजय कुमार मंडावी ने बच्चों की इस सोच की मुक्त कंठ से प्रशंसा की और स्वयं भी इस पुनीत कार्य में अपना योगदान दिया।
विद्यालय और अभिभावकों का सहयोग
बच्चों के इस संवेदनशील निर्णय में विद्यालय के प्राचार्य श्री नापित, संचालक पवन देवांगन, सारिका देवांगन सहित उनकी माता श्रीमती ऋतु चन्द्रवेश राणा का विशेष मार्गदर्शन एवं सहयोग रहा। शिक्षकों (लोकनाथ, सागर नामदेव, श्रीमती कांता महिपाल, चित्ररेखा मैडम) ने बच्चों के इन संस्कारों को शिक्षा का असली उद्देश्य बताया है।
अशोका पब्लिक स्कूल प्रबंधन एवं पिता चन्द्रवेश राणा का कहना है कि शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि वास्तविक शिक्षा वही है जो बच्चों को संवेदनशील और परोपकारी इंसान बनाए।




