एससीईआरटी का पांच दिवसीय प्रशिक्षण प्रारंभ, 125 शिक्षक हो रहे प्रशिक्षित

प्राथमिक स्तर की शिक्षा में गुणवत्ता बढ़ाने तथा विद्यार्थियों की बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक दक्षता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) द्वारा आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हो गया है। यह प्रशिक्षण दूसरे चरण के अंतर्गत शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय, ग्राम कुई में आयोजित किया जा रहा है, जो 15 जनवरी तक चलेगा।
प्रशिक्षण प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक संचालित किया जा रहा है। इसमें 12 संकुलों के कुल 125 प्राथमिक शिक्षक भाग ले रहे हैं। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य नई पाठ्य-पुस्तकों के अनुरूप शिक्षकों को दक्ष बनाना तथा कक्षा स्तर पर शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना है।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2022 के अनुसार बहुभाषा आधारित शिक्षा और संतुलित भाषा शिक्षण पद्धति पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत मौखिक भाषा विकास, शब्द पहचान, पठन और लेखन—इन चार प्रमुख खंडों पर शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

कुई जोन के अंतर्गत ग्राम कुई, नेऊर, बदना, पोलमी, भाकुर, सैंदूरखार, मुनमुना, चियाडाड़, चतरी, कोदवागोडान, सरईसेत एवं खैरडोंगरी के प्राथमिक शिक्षक इस प्रशिक्षण में शामिल हैं।
पठन-लेखन कौशल पर विशेष फोकस
प्रशिक्षण के दौरान मौखिक भाषा विकास के अंतर्गत शिक्षक मातृभाषा में बच्चों के साथ चित्रों पर चर्चा, अनुभव साझा करना, कहानी सुनाना, नाटक एवं पात्र अभिनय जैसी गतिविधियों का अभ्यास कर रहे हैं। इससे बच्चों की संवाद क्षमता, अभिव्यक्ति और समझ में वृद्धि होगी।
शब्द पहचान के प्रशिक्षण में ध्वनि जागरूकता, डिकोडिंग, प्रिंट अवेयरनेस और ब्लेंडिंग जैसी विधियों के माध्यम से बच्चों को अक्षर और शब्द पहचानने में सक्षम बनाने पर बल दिया जा रहा है। साथ ही पठन और लेखन कौशल के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
विषय विशेषज्ञ दे रहे मार्गदर्शन
नवीन शिक्षण पद्धति की साप्ताहिक रूपरेखा 4+1+1 मॉडल पर आधारित है, जिसमें सप्ताह के चार दिन नई दक्षताओं पर कार्य किया जाता है। प्रशिक्षण में विषय विशेषज्ञ शिक्षक व मास्टर ट्रेनर शिवकुमार बंजारे, लक्ष्मण बांधेकर, देवलाल साहू एवं विक्रम जांगड़े अपने अनुभव साझा कर रहे हैं और उदाहरणों के माध्यम से शिक्षकों का मार्गदर्शन कर रहे हैं।
इसके साथ ही गणित शिक्षण में ईएलपीएस (ELPS) एप्रोच पर विशेष ध्यान देते हुए शिक्षकों को व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे बच्चों में गणितीय समझ और रुचि विकसित की जा सके।



