कलेक्टर के आदेश हवा में: 10 माह बाद भी जांच लंबित, करोड़ों के धान घोटाले में जिम्मेदारी तय नहीं

संयुक्त जांच समिति की सुस्ती पर उठे सवाल; कवर्धा के दो बड़े संग्रहण केंद्रों से गायब हुआ था ₹8.5 करोड़ का धान
चौंकाने वाला फैसला: निलंबित प्रभारी को चुपचाप किया बहाल, दूसरे पर कार्रवाई के बजाय सौंपी नई जिम्मेदारी
युवा कांग्रेस का बड़ा आरोप- दो सत्रों में करीब 30 करोड़ रुपये का हुआ ‘महाघोटाला’, अधिकारियों पर संरक्षण देने के आरोप

कवर्धा – कलेक्टर के सख्त निर्देशों के बावजूद जिला प्रशासन और विभागीय अधिकारियों की सुस्ती के कारण करोड़ों रुपये का धान घोटाला ठंडे बस्ते में जाता दिख रहा है। धान खरीदी सत्र 2024-25 में जिले के दो प्रमुख संग्रहण केंद्रों—बाजार चारभाठा और बघर्रा—से लगभग 8.5 करोड़ रुपये मूल्य का धान गायब होने का मामला सामने आए नौ महीने से अधिक का समय बीत चुका है। कलेक्टर द्वारा गठित जिला खाद्य शाखा, जिला विपणन विभाग और नोडल अधिकारियों की संयुक्त जांच समिति अब तक किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी है। जांच की इस कछुआ चाल और दोषियों पर कार्रवाई के अभाव ने प्रशासनिक निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

दस्तावेजों में हुआ भंडाफोड़, बहानेबाजी में उलझा मामला
सूचना के अधिकार (RTI) के तहत युवा कांग्रेस के प्रदेश सचिव आकाश केशरवानी द्वारा निकाले गए दस्तावेजों से इस कथित घोटाले का पर्दाफाश हुआ था। सितंबर 2025 में शिकायत के बाद कलेक्टर ने उच्च स्तरीय संयुक्त जांच टीम गठित कर जल्द कार्रवाई का भरोसा दिया था। लेकिन 10 माह बाद भी जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है। आरोप है कि अब मामले को रफा-दफा करने और कार्रवाई टालने के लिए तकनीकी अड़चनों और प्रक्रियागत बहानों का सहारा लिया जा रहा है।

आंकड़ों का खेल: दो केंद्रों में हजारों क्विंटल धान कम
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक धान खरीदी सत्र 2024-25 में दोनों संग्रहण केंद्रों में कुल 8 लाख 3 हजार 528 क्विंटल धान संग्रहित किया गया था:
बाजार चारभाठा केंद्र: यहाँ संग्रहित 6,46,486 क्विंटल धान के मुकाबले 22,997 क्विंटल धान कम पाया गया (लगभग 3.56% की कमी)।
बघर्रा केंद्र: यहाँ संग्रहित 1,57,042 क्विंटल धान के मुकाबले 4,673 क्विंटल धान गायब मिला (लगभग 3.0% की कमी)।
कार्रवाई के नाम पर लीपापोती?
हैरान करने वाली बात यह है कि बाजार चारभाठा केंद्र में इतनी बड़ी कमी मिलने पर तत्कालीन प्रभारी को निलंबित तो किया गया, लेकिन बाद में उन्हें चुपचाप बहाल कर दिया गया। वहीं, बघर्रा केंद्र के प्रभारी पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, बल्कि उन्हें वर्ष 2025-26 के धान संग्रहण का कार्य भी दोबारा सौंप दिया गया।
चूहों, दीमक और मौसम पर फोड़ा ठीकरा
सूत्रों के अनुसार, करोड़ों रुपये के इस धान शॉर्टेज को सही ठहराने के लिए जिम्मेदार विभाग द्वारा चूहों, दीमक, कीटों और खराब मौसम जैसे अजीबोगरीब बहानों को आगे बढ़ाया गया। इस मामले में विवादित बयान देने पर राज्य सरकार ने तत्कालीन जिला विपणन अधिकारी अभिषेक मिश्रा को निलंबित कर दिया था, लेकिन वास्तविक खरीदी और संग्रहण की अवधि में जिले में जिला विपणन अधिकारी के रूप में किशोर चंद्रा पदस्थ थे। उन पर या अन्य वास्तविक जिम्मेदारों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
दो सालों में ₹30 करोड़ से अधिक का ‘महाघोटाला’: आकाश केशरवानी
युवा कांग्रेस प्रदेश सचिव आकाश केशरवानी ने मार्कफेड की वेबसाइट के आंकड़ों का हवाला देते हुए सरकार और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से बड़े महाघोटाले का आरोप लगाया है।
सत्र 2024-25: जिले के सभी उपार्जन केंद्रों से उठाव के बाद कुल 46,360 क्विंटल से अधिक धान की कमी पाई गई, जिसका मूल्य लगभग 14 करोड़ 37 लाख रुपये है। इसमें से अकेले बाजार चारभाठा और बघर्रा से 27,670 क्विंटल (कीमत लगभग ₹8.5 करोड़) धान गायब था।
सत्र 2025-26: इस सत्र में भी उठाव के बाद मार्कफेड की वेबसाइट पर करीब 52 हजार क्विंटल धान की कमी दर्ज है, जिसका अनुमानित मूल्य 16 करोड़ रुपये से अधिक है।
केशरवानी ने आरोप लगाया कि बड़ी समितियों और रसूखदारों को बचाने के लिए जिला प्रशासन और विपणन विभाग रिपोर्ट दबाकर बैठा है। इतनी बड़ी वित्तीय अनियमितता के बाद भी न तो अब तक राशि की वसूली हुई है और न ही दोषियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है।
अब जनता पूछ रही सवाल:
करोड़ों के सरकारी धान का गबन करने वाले असल चेहरे कब बेनकाब होंगे? क्या चूहों और दीमक के बहानों के पीछे असली गुनाहगारों को छुपाने का प्रयास जारी रहेगा या कलेक्टर अपनी ही समिति पर सख्त रुख अपनाएंगे?



