बोड़ला – ग्रामीण इलाकों को बारहमासी पक्की सड़कों से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना’ (PMGSY) भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। ताजा मामला छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा के गृह जिले का है, जहां दलदली मुख्य मार्ग से अगरी तक बनाई गई सड़क में भारी भरकम भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण का गंभीर आरोप ग्रामीणों और खुद स्थानीय सरपंच ने लगाया है। ₹248.99 लाख की लागत, पर धरातल पर सिर्फ ‘मिट्टी-मुरुम’ मिली जानकारी के अनुसार, इस सड़क निर्माण की कुल लागत 248.99 लाख रुपए (लगभग ढाई करोड़) है, और इसका ठेका तिलक राम चंद्रवंशी नामक ठेकेदार को दिया गया था। तकनीकी मापदंडों और वर्क ऑर्डर के मुताबिक, इस सड़क के बेस को मजबूत करने के लिए 75 mm की गिट्टी डालकर दो अलग-अलग लेयर (परतों) में निर्माण किया जाना था।
लेकिन धरातल पर नियमों को ताक पर रख दिया गया। स्थानीय सरपंच और ग्रामीणों का साफ तौर पर कहना है कि ठेकेदार द्वारा तय मापदंडों की गिट्टी का इस्तेमाल करने के बजाय सिर्फ मुरुम और मिट्टी डालकर खानापूर्ति कर दी गई।
गृहमंत्री ने किया था उद्घाटन, ठेकेदार-अधिकारियों को ‘प्रशासन’ का खौफ नहीं!
यह मामला बेहद सोचनीय और गंभीर इसलिए हो जाता है क्योंकि यह सीधे प्रदेश के हाई-प्रोफाइल गृहमंत्री विजय शर्मा के गृह क्षेत्र से जुड़ा है। सरपंच के मुताबिक, इस चमचमाती (कागजों पर) सड़क का उद्घाटन खुद गृहमंत्री विजय शर्मा ने किया था।
“जब गृहमंत्री के खुद के क्षेत्र में विभागीय अधिकारियों और कार्य एजेंसी को प्रशासन का रत्ती भर भी खौफ नहीं है, तो बाकी जगहों की स्थिति क्या होगी? इससे तो यही प्रतीत होता है कि भ्रष्टाचार की इस ‘मिठाई’ का स्वाद नीचे से लेकर ऊपर तक के तंत्र को मिल रहा है।” — ग्रामीणों में आक्रोश
महज दो महीने में खुली पोल, गुणवत्ता जांच पर उठे सवाल
सड़क की बदहाली का आलम यह है कि महज दो महीने पहले, यानी 10 से 20 अप्रैल के बीच ही इस रोड पर डामरीकरण (पिचिंग) का कार्य किया गया था। लेकिन जून-जुलाई की शुरुआती बारिश ने ही ठेकेदार और विभाग की ‘मिलीभगत’ की कलई खोलकर रख दी है। दो महीने के भीतर ही सड़क जगह-जगह से उखड़ने लगी है और इसकी जो दुर्दशा हो रही है, उसे बयां करने के लिए किसी गवाह की जरूरत नहीं है, सड़क खुद अपनी बदहाली की कहानी रो रही है।
बड़ा सवाल: ‘क्वालिटी कंट्रोल’ की आंखें बंद क्यों?
जनता के मन में अब यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि आखिर इतने बड़े और करोड़ों के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच करने वाले ‘क्वालिटी कंट्रोल’ (Quality Control) के अधिकारी कैसे इस घटिया काम को पास कर देते हैं? योजनाएं जनता की सुविधा के लिए धरातल पर उतारी जाती हैं, लेकिन इस भ्रष्ट सिस्टम के चलते सीधा लाभ सिर्फ ठेकेदार और मिलीभगत करने वाले अधिकारियों की जेब को पहुंच रहा है।
जांच की मांग: ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने अब इस मामले में उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है। देखना यह होगा कि गृहमंत्री के गृह जिले के इस मामले पर प्रशासन क्या एक्शन लेता है और दोषी ठेकेदार व लापरवाह इंजीनियरों पर गाज गिरती है या फिर इस भ्रष्टाचार पर भी हमेशा की तरह पर्दा डाल दिया जाएगा।