छत्तीसगढ़ के कोटवारों ने उठाई नियमितीकरण की मांग; मुख्यमंत्री साय के नाम सौंपा 6 सूत्रीय मांग पत्र

पीढ़ियों से सेवा के बाद भी नाममात्र का पारिश्रमिक, राजस्व विभाग में संविलियन और मानदेय वृद्धि की मुख्य मांग।
बोड़ला – कोटवार एसोसिएशन ऑफ छत्तीसगढ़ (तहसील शाखा बोड़ला, जिला कबीरधाम) द्वारा प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय विष्णुदेव साय के नाम अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं तहसीलदार बोड़ला को अपनी ज्वलंत व मानवीय समस्याओं के निराकरण हेतु एक महत्वपूर्ण ज्ञापन सौंपा गया है। एसोसिएशन ने शासन का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा है कि यदि उनकी जायज मांगों पर शीघ्र पहल नहीं की गई, तो प्रदेश के कोटवार और उनका परिवार गहरे सामाजिक व आर्थिक संकट में डूब जाएगा।

पीढ़ी-दर-पीढ़ी सेवा के बाद भी उपेक्षा का शिकार: एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि कोटवार अंग्रेजी शासनकाल से ही निरंतर शासन-प्रशासन और आम जनता की बुनियादी सेवा करते आ रहे हैं। अत्यंत खेद का विषय है कि इतनी लंबी सेवा के बावजूद उन्हें आज तक नियमित कर्मचारी का दर्जा नहीं मिला है। सेवानिवृत्ति या मृत्यु की स्थिति में कोटवारों को पेंशन और ग्रेच्युटी जैसी शासकीय योजनाओं का कोई लाभ नहीं मिलता, जिससे उन्हें वृद्धावस्था में अत्यंत दयनीय स्थिति में जीवन यापन करना पड़ता है। कोटवारों ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले का हवाला देते हुए मांग की है कि 10 वर्ष की सेवा अवधि पूर्ण करने वाले अस्थाई कर्मियों की तरह उन्हें भी नियमित कर राजस्व विभाग में संविलियन किया जाए।

कोटवारों की प्रमुख 6 सूत्रीय मांगें: 1. नियमितीकरण: समस्त कोटवारों को नियमित कर्मचारी घोषित कर राजस्व विभाग में संविलियन किया जाए।
- महंगाई के अनुपात में मानदेय वृद्धि: वर्तमान में मिल रहा पारिश्रमिक बेहद कम है, जिसे तत्काल बढ़ाया जाए।
- नियुक्ति में वंशज को प्राथमिकता: सेवानिवृत्त कोटवार के परिवार के सदस्य को प्राथमिकता देने के नियम का पालन हो; अधिकारियों द्वारा की जा रही मनमानी नियुक्तियों पर रोक लगे।
- भ्रष्टाचार पर रोक: कोटवारी नियुक्ति में जारी भ्रष्टाचार को तुरंत बंद कर दोषी अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई की जाए।
- बेगारी से मुक्ति: मूल कर्तव्यों के अलावा राजस्व अधिकारियों द्वारा कराई जा रही अनावश्यक ‘बेगारी’ पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।
- एकपक्षीय कार्रवाई पर रोक: बिना विधिवत जांच और कोटवारों का पक्ष सुने, झूठी शिकायतों के आधार पर निलंबन या पदमुक्ति की कार्रवाई न की जाए। साथ ही नगरीय निकाय क्षेत्रों में नियुक्ति पर लगा प्रतिबंध हटाया जाए।
एसोसिएशन द्वारा प्रस्तावित मानदेय का ढांचा: कोटवारों ने अपनी भूमि के आधार पर मानदेय में इस प्रकार वृद्धि की मांग की है:
श्रेणी (A) [कोई भूमि नहीं]: वर्तमान ₹6,000 से बढ़ाकर ₹15,000 प्रतिमाह किया जाए।
श्रेणी (B) [3 से 7.50 एकड़ भूमि]: वर्तमान ₹5,500 से बढ़ाकर ₹12,000 प्रतिमाह किया जाए।
श्रेणी (C) [7.50 से 10 एकड़ भूमि]: वर्तमान ₹4,500 से बढ़ाकर ₹10,000 प्रतिमाह किया जाए।
श्रेणी (D) [10 एकड़ से अधिक भूमि]: वर्तमान ₹3,000 से बढ़ाकर ₹8,000 प्रतिमाह किया जाए।
ज्ञापन सौंपने के दौरान कोटवार एसोसिएशन बोड़ला के अध्यक्ष रोशन दास मानिकपुरी, सचिव भरत दास मानिकपुरी, सह-सचिव सेवक दास मानिकपुरी, कोषाध्यक्ष धरम दास मानिकपुरी सहित संगठन के अनेक सक्रिय सदस्य और पदाधिकारी उपस्थित रहे।
उन्होंने मुख्यमंत्री से इस शोषित वर्ग के हित में अविलंब न्यायसंगत शासनादेश जारी करने की पुरजोर अपील की है।




