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जल जीवन मिशन ने बदली बैगा बहुल मुड़घुसरी प्लाट की तस्वीर

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घंटों की मशक्कत से मिली राहत, अब घरों तक पहुंच रहा साफ पानी

कवर्धा, 16 जून 2026/ कबीरधाम जिले के विकासखंड बोड़ला अंतर्गत बैगा जनजाति बहुल ग्राम मुड़घुसरी प्लाट कभी पेयजल संकट से जूझने वाला गांव था। वनांचल क्षेत्र में बसे इस गांवों के लोगों को दैनिक उपयोग के लिए पानी जुटाने हेतु काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। विशेषकर महिलाओं और बुजुर्गों को घर से दूर स्थित हैंडपंपों एवं अन्य जल स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता था। गर्मी के मौसम में जल स्रोतों का जलस्तर घटने से स्थिति और भी गंभीर हो जाती थी तथा स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन जाती थी।

गांव की भौगोलिक परिस्थितियों के कारण ग्रामीणों को प्रतिदिन कई बार लंबी दूरी तय कर पानी लाना पड़ता था। पानी की व्यवस्था में लगने वाला समय और श्रम उनके सामाजिक एवं आर्थिक जीवन को प्रभावित करता था। महिलाओं का अधिकांश समय पानी लाने में व्यतीत हो जाता था, जिससे वे परिवार, बच्चों की शिक्षा तथा अन्य घरेलू कार्यों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे पाती थीं।

ऐसे समय में भारत सरकार की जल जीवन मिशन योजना ग्रामवासियों के लिए राहत लेकर आई। योजना के तहत ग्राम मुड़घुसरी प्लाट के सभी पात्र परिवारों को घरेलू नल कनेक्शन उपलब्ध कराए गए। वर्तमान में गांव के 28 घरों में फंक्शनल हाउसहोल्ड टैप कनेक्शन (एफएचटीसी) प्रदान किए जा चुके हैं, जिससे प्रत्येक परिवार को घर पर ही स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध हो रहा है।

योजना के अंतर्गत जल स्रोतों का विकास, पाइपलाइन विस्तार, जल भंडारण व्यवस्था तथा घरेलू नल कनेक्शन जैसी आवश्यक अधोसंरचनाओं का निर्माण किया गया। इसका परिणाम यह हुआ कि आज गांव के प्रत्येक परिवार तक स्वच्छ पेयजल पहुंच रहा है। यह बदलाव केवल एक सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीणों के स्वास्थ्य, सम्मान और जीवन स्तर में व्यापक सुधार का माध्यम बना है।

जब पानी के लिए बीत जाते थे कई घंटे
गांव में रहने वाली श्रीमती खुटू बाई बैगा बताती हैं कि कुछ वर्ष पहले तक उनके परिवार को पानी के लिए रोजाना संघर्ष करना पड़ता था। सुबह और शाम घर के कामकाज छोड़कर उन्हें दूर स्थित जल स्रोतों तक जाना पड़ता था। कई बार अपनी बारी के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता था और गर्मी के दिनों में पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बनी रहती थी।
खुटू बाई कहती हैं, “पहले पानी लाने के लिए रोज दूर जाना पड़ता था। कई बार सुबह जल्दी निकलना पड़ता था और घंटों इंतजार करना पड़ता था। अब घर के पास ही नल से पानी मिलने लगा है। इससे हमारी मेहनत और समय दोनों की बचत हो रही है।” वे बताती हैं कि अब पानी के लिए लंबी दूरी तय करने की जरूरत नहीं पड़ती। घर पर ही पर्याप्त मात्रा में साफ पानी उपलब्ध होने से दैनिक जीवन काफी सरल हो गया है। बचा हुआ समय अब वे परिवार की देखभाल और अन्य उपयोगी कार्यों में लगा पा रही हैं।

गांव की सबसे बड़ी समस्या हुई दूर- रामफल बैगा
ग्राम निवासी श्री रामफल बैगा बताते हैं कि पहले उनके परिवार को पीने और घरेलू उपयोग के लिए पानी जुटाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। विशेषकर गर्मी के दिनों में पानी की उपलब्धता अनिश्चित रहती थी, जिससे दैनिक कार्य प्रभावित होते थे।
रामफल बैगा के अनुसार परिवार के सदस्यों को कई बार दिन में एक से अधिक बार पानी लाने जाना पड़ता था। इससे समय और श्रम दोनों की हानि होती थी तथा खेती-किसानी और अन्य कार्यों के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता था।
वे कहते हैं, “जल जीवन मिशन के आने से हमारे गांव की सबसे बड़ी समस्या दूर हो गई है। अब घर के पास ही स्वच्छ पानी उपलब्ध है। परिवार को राहत मिली है और जीवन पहले की तुलना में कहीं अधिक सुविधाजनक हो गया है।”
रामफल बताते हैं कि स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता से ग्रामीणों के स्वास्थ्य में भी सकारात्मक सुधार देखने को मिल रहा है। दूषित जल के उपयोग में कमी आने से जलजनित बीमारियों का खतरा भी कम हुआ है।

महिलाओं को राहत, बच्चों को मिला बेहतर स्वास्थ्य
जल जीवन मिशन के प्रभाव से ग्राम मुड़घुसरी प्लाट में केवल पेयजल संकट का समाधान ही नहीं हुआ है, बल्कि ग्रामीणों के जीवन स्तर में भी व्यापक बदलाव आया है। महिलाओं को पानी लाने की कठिन जिम्मेदारी से राहत मिली है, वहीं बच्चों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध होने से उनके स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। ग्रामीणों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता भी बढ़ी है।
आज नल के माध्यम से नियमित जलापूर्ति होने से लोगों का समय और श्रम दोनों बच रहे हैं। यह समय अब परिवार, शिक्षा, आजीविका और सामाजिक गतिविधियों में उपयोग हो रहा है। ग्राम पंचायत, ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति तथा ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी से योजना का संचालन एवं रखरखाव प्रभावी ढंग से किया जा रहा है। सामुदायिक सहयोग के कारण जल संरचनाओं का संरक्षण भी बेहतर तरीके से हो रहा है, जिससे योजना की दीर्घकालिक सफलता सुनिश्चित हो सके।
आज खुटू बाई और रामफल बैगा जैसे ग्रामीणों के चेहरों पर दिखाई देने वाली संतोष की मुस्कान इस बात का प्रमाण है कि जब सरकारी योजनाएं प्रभावी क्रियान्वयन और जनभागीदारी के साथ धरातल पर उतरती हैं, तब वे लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने में सफल होती हैं।

मुकेश अवस्थी

प्रधान संपादक

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