कवर्धामध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़

नेशनल हाईवे किनारे हरे-भरे वृक्षों की अवैध कटाई, वन विभाग की चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल

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कवर्धा – बोड़ला वन क्षेत्र से लगे चोरभट्टी RF-62 में हरे-भरे कीमती वृक्षों की अवैध कटाई का मामला सामने आया है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह कटाई किसी दूरस्थ जंगल में नहीं बल्कि नेशनल हाईवे-30 से महज करीब सात फीट की दूरी पर की गई है, फिर भी वन विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी।
जानकारी के अनुसार अज्ञात लोगों ने चार से पांच हरे-भरे और कीमती वृक्षों को काट दिया, जिससे वन संपदा को भारी नुकसान हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि वन विभाग के कर्मचारी नियमित रूप से क्षेत्र का निरीक्षण करते तो इतनी खुली जगह पर इस तरह की अवैध कटाई संभव ही नहीं थी।


मामले में जब विभागीय अधिकारियों से जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो डिप्टी रेंजर का बयान बेहद चौंकाने वाला रहा। उन्होंने कहा कि “जंगल खुला है तो अवैध कटाई होगी ही”। इस बयान से विभाग की जिम्मेदारी और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
वहीं रेंजर आकाश यादव इस पूरे मामले को दबाने में लगे नजर आए। सूत्रों के अनुसार उन्होंने इस विषय को ज्यादा उजागर न करने और मामले को अपने तक रखने की बात कही, जिससे विभाग की भूमिका को लेकर संदेह और गहरा गया है।
इधर इस मामले में डीएफओ से भी संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन कॉल रिसीव नहीं किया। कॉल करने से पहले ही उन्हें कटे हुए वृक्षों की फोटो और वीडियो भी भेजे गए थे, इसके बावजूद उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नेशनल हाईवे के किनारे खुलेआम वृक्ष काटे जा रहे हैं और जिम्मेदार अधिकारी जवाब देने से बच रहे हैं, तो आखिर वन संपदा की सुरक्षा कैसे होगी। अब देखना होगा कि वन विभाग इस मामले में दोषियों पर कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला

मुकेश अवस्थी

प्रधान संपादक

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