कवर्धामध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़

घर वापसी के 700+ दावों पर गहराया विवाद: आरोपों के बाद समाज प्रमुखों ने मांगी नामवार सूची, विधायक भावना बोहरा के दावों पर उठे सवाल

News Ad Slider

कवर्धा/पंडरिया।
छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के पंडरिया विधानसभा क्षेत्र में आयोजित हुए तथाकथित “घर वापसी” कार्यक्रमों को लेकर उपजा विवाद अब और गहरा गया है। पंडरिया की विधायक भावना बोहरा द्वारा सोशल मीडिया रील और मुख्यधारा की मीडिया में किए गए 700 से अधिक लोगों की ‘घर वापसी’ के दावों की जमीनी हकीकत पर स्थानीय समाज प्रतिनिधियों, ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब इस मामले में प्रलोभन देने और जबरन आंकड़ों को बढ़ाने के सनसनीखेज आरोप भी सामने आए हैं, जिसके बाद प्रशासन से पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है।


प्रलोभन देकर ‘घर वापसी’ दिखाने का आरोप: ग्राम पटेल का बड़ा खुलासा
प्रेस वार्ता के दौरान स्थानीय ग्राम पटेलों और जनप्रतिनिधियों ने कार्यक्रम की आंतरिक सच्चाई बताते हुए गंभीर आरोप लगाए। जामुनपानी के ग्राम पटेल रमेश कुमार धुर्वे ने सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि, “इन तथाकथित कार्यक्रमों के लिए गांवों में गाड़ियां भेजी जाती थीं। भोले-भाले आदिवासी लोगों को तरह-तरह के प्रलोभन दिए गए। उन्हें कार्यक्रम में ले जाकर सीधे पैर धुलवाने के लिए बैठा दिया जाता था और साड़ी, केला व कुछ पैसे देकर यह प्रचारित किया गया कि उनकी ‘घर वापसी’ कराई गई है।”


ग्राम पटेल ने आगे एक बड़ा तकनीकी सवाल उठाते हुए कहा कि, “क्षेत्र के जिन गांवों में वास्तव में 10 या 11 परिवार ऐसे हैं जो ईसाई धर्म अपना चुके हैं, वे लोग तो इस सभा में गए ही नहीं। वे आज भी अपने उसी धर्म को मान रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब वास्तविक धर्म परिवर्तित लोग वहां गए ही नहीं, तो विधायक द्वारा दिखाए जा रहे 700+ के आंकड़े में पैर धुलवाकर किन लोगों को शामिल किया गया है? यह पूरी तरह से जांच का विषय है।”


जनता को सच जानने का अधिकार, सूची हो सार्वजनिक


प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए आनंद सिंह, अतुल बारगाह और चंद्रभान कोशले ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपनी स्वेच्छा से मूल परंपरा में लौटता है, तो वह स्वागत योग्य है। लेकिन जब सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया (Reels) के माध्यम से 700 से अधिक लोगों की घर वापसी जैसे विशाल आंकड़े दिखाए जाते हैं, तो समाज और जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि वे लोग कौन हैं। वक्ताओं ने मांग की कि विधायक भावना बोहरा द्वारा प्रचारित किए जा रहे उन 700 लोगों की ग्रामवार और नामवार सूची तत्काल सार्वजनिक की जाए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।


जमीनी हकीकत दावों से कोसों दूर
ग्राम पंचायत बूचीपारा के पंच, उपसरपंच और ग्रामीणों ने कहा कि कूल्हीडोंगरी, नागाडबरा, पिपरहा, जामुनपानी और छिरहा जैसे वनांचल क्षेत्रों में आदिवासी समाज के लोग पीढ़ियों से अपनी पारंपरिक आस्था और सामाजिक रीति-रिवाजों का पालन करते आ रहे हैं। इन क्षेत्रों के लगभग 200 परिवारों की घर वापसी का जो दावा किया जा रहा है, वह स्थानीय जमीनी हकीकत से बिल्कुल मेल नहीं खाता।
नारायण सिंह धुर्वे ने बताया कि वे पहले से ही सामाजिक स्तर पर अपनी पारंपरिक आस्था से जुड़े हुए थे, इसके बावजूद उन्हें दोबारा कार्यक्रम में ‘घर वापसी’ के रूप में प्रदर्शित कर दिया गया, जो केवल संख्या बढ़ाने का प्रयास प्रतीत होता है।
आवाज उठाने पर कार्रवाई और सर्किट हाउस निरस्तीकरण पर रोष
मामले में राजनीतिक व प्रशासनिक दबाव के भी आरोप लगे हैं:
थानेदार के तबादले पर सवाल: पूर्व सरपंच एवं आदिवासी समाज प्रतिनिधि (कूल्हीडोंगरी) कृष्णा परस्ते ने आरोप लगाया कि, “मुझे इस विसंगति के खिलाफ आवाज उठाने की सजा दी जा रही है। मेरे खिलाफ थाने में झूठी शिकायत करवाई गई। हद तो तब हो गई जब शिकायत न लिखने पर स्थानीय थानेदार का तबादला तक कर दिया गया।” उन्होंने इस दमनकारी नीति की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

समाज प्रमुखों ने बताया कि प्रेस वार्ता के लिए पहले पुराना सर्किट हाउस आवंटित किया गया था, लेकिन ऐन वक्त पर सुबह 10:30 बजे आवंटन निरस्त कर दिया गया, ताकि वे अपनी बात मीडिया के सामने न रख सकें।
निष्पक्ष जांच की पुरजोर मांग
क्षेत्रवासियों और समाज प्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की स्वतंत्र और तथ्यपरक जांच कराई जाए। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यह मामला केवल किसी राजनीतिक दल या श्रेय लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वनांचल क्षेत्र के सीधे-साधे आदिवासियों की सामाजिक विश्वसनीयता और जनविश्वास से जुड़ा हुआ संवेदनशील मुद्दा है।

मुकेश अवस्थी

प्रधान संपादक

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

क्षमा करें ! कॉपी नहीं की जा सकी !