कवर्धामध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़

कवर्धा जिले के बोड़ला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बड़ी लापरवाही: प्रसूति वार्ड के खुले बिजली प्लग से मंडराता रहा करंट का खतरा

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बोड़ला = छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले स्थित बोड़ला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में स्वास्थ्य विभाग की एक बड़ी और खतरनाक लापरवाही सामने आई है। प्रसूति वार्ड (डिलीवरी वार्ड), जहां नवजात शिशुओं और जच्चा-परिच्चा की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए, वहां बिजली के खुले प्लग और बोर्ड पर कवर तक नहीं था। गनीमत रही कि समय रहते एक सजग नागरिक की नजर इस पर पड़ गई, वरना बारिश के इस मौसम में कोई बड़ा हादसा हो सकता था।


क्या है पूरा मामला?
सूत्रों और स्थानीय जानकारी के अनुसार, बोड़ला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के उस वार्ड में जहां गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी होती है, बिजली का एक प्लग पूरी तरह खुला हुआ था। प्लग का कवर गायब था और अंदर के नंगे तार स्पष्ट दिखाई दे रहे थे।
इस गंभीर स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों और तीमारदारों में भारी आक्रोश है। लोगों का सवाल है कि क्या अस्पताल प्रबंधन के पास इतने भी फंड्स नहीं हैं कि वे कुछ रुपयों का स्विच और प्लग बदलवा सकें या सुरक्षा कवर लगवा सकें?


बारिश के मौसम में था जानलेवा खतरा
वर्तमान में मानसून और बारिश का मौसम चल रहा है, ऐसे मौसम में नमी के कारण दीवारों और बिजली के उपकरणों में करंट उतरने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। प्रसूति वार्ड में छोटे नवजात बच्चे और प्रसूताएं मौजूद रहती हैं। यदि धोखे से भी किसी मासूम बच्चे या मरीज का हाथ उस खुले हुए प्लग पर चला जाता, तो यह एक बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता था और अस्पताल की लापरवाही किसी की जान पर भारी पड़ सकती थी।
नागरिक की नजर पड़ने पर हरकत में आया अमला
मामले की गंभीरता तब उजागर हुई जब एक सजग नागरिक की नजर इस खुले हुए खतरनाक प्लग पर पड़ी। नागरिक द्वारा आपत्ति जताए जाने और अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल उठाने के बाद विभाग के कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। इसके बाद आनन-फानन में तकनीकी सुधार करने के बजाय लापरवाही पर पर्दा डालने के लिए महज ‘ड्रेसिंग करने वाले टेप’ (मेडिकल टेप) से खुले स्विच और प्लग को ढंक दिया गया।


स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थानों पर इस तरह की लापरवाही विभाग की संवेदनहीनता को बयां करती है। एक तरफ सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने के दावे कर रही है, वहीं मैदानी स्तर पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की ऐसी बदइंतजामी आम जनता की जान से खिलवाड़ कर रही है।
अब देखना यह होगा कि इस गंभीर मामले के सामने आने के बाद जिम्मेदार उच्च अधिकारी इस लापरवाही पर क्या कार्रवाई करते हैं या फिर इसे महज एक छोटी सी चूक मानकर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।

मुकेश अवस्थी

प्रधान संपादक

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