दिल का सूना साज़ तराना ढूंढेगा, मुझको मेरे बाद जमाना ढूंढेगा

स्वर सम्राट मोहम्मद रफी की 46वीं पुण्यतिथि पर रीवा के मानस भवन में संगीतमय श्रद्धांजलि
रीवा। भारतीय सिनेमा के अमर पार्श्वगायक एवं ‘स्वर सम्राट’ स्वर्गीय मोहम्मद रफी साहब की 46वीं पुण्यतिथि के अवसर पर मानस भवन में मुकेश एंड मुकेश ऑर्केस्ट्रा द्वारा एक भव्य संगीतमय श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में रफी साहब के अमर नगमें गूंजते रहे, जिनकी मधुर प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया और पूरा सभागार संगीत के रंग में सराबोर हो गया।

अतिथियों की उपस्थिति और दीप प्रज्वलन
समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा मोहम्मद रफी साहब के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में:
राजनीतिक एवं सामाजिक प्रतिनिधि: भाजपा रीवा जिलाध्यक्ष वीरेंद्र गुप्ता, कांग्रेस ग्रामीण अध्यक्ष इंजी. राजेंद्र शर्मा, मानस मंडल अध्यक्ष सुभाष चंद्र पांडे।
विशिष्ट नागरिक एवं चिकित्सक: अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा, मानवेंद्र सिंह, संतोष अवधिया, डी. पी. सिंह, पत्रकार गुड्डू भैया।
गणमान्य हस्तियां: श्रीमती मनीषा पाठक, श्रीमती संध्या गौतम, श्रीमती अनीता मिश्रा, श्रीमती सरस्वती गुप्ता, डॉ. शैलजा सोनी, डॉ. सरोज सोनी, दिशा दुबे, पूजा सिंह, आशीष श्रीवास्तव, श्रीमती पूजा श्रीवास्तव, श्रीमती सविता तिवारी, श्रीमती कल्पना पांडे एवं श्रीमती आकांक्षा सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
सम्मान समारोह
कार्यक्रम के दौरान डी. पी. सिंह जी को सम्मानित किया गया। साथ ही, कार्यक्रम का सफल संचालन कर रहे अवनीश शर्मा जी को उनकी सेवानिवृत्ति के अवसर पर अतिथियों द्वारा भावभीनी विदाई देते हुए विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
सदाबहार गीतों से जीवंत हुईं रफी साहब की स्मृतियां
श्रद्धांजलि सभा की शुरुआत और विभिन्न कलाकारों की प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया:
नवीन निगम: अमर अकबर एंथनी का प्रसिद्ध भजन “शिरडी वाले साईं बाबा”।
संजय सिंह राजपूत: फिल्म दोस्ती का अमर गीत “चाहूंगा मैं तुम्हें शाम सवेरे”।
आकाश सोनी एवं श्रद्धा सुमन: युगल गीत “यह दिल तुम बिन कहीं लगता नहीं”।
राजू वर्मा एवं सुरभि अवधिया: “यह रेशमी जुल्फें” और “बहारों फूल बरसाओ” की मंत्रमुग्ध कर देने वाली प्रस्तुति।
संदीप जड़िया: “तुम मुझे यूं भुला न पाओगे”।
कमलेश शुक्ला: “वादियां मेरा दामन”।
राज कपूर शुक्ला: “छलकाए जाम”।
आयोजक डॉ. प्रवीर चंद्र दुबे: “अकेले हैं चले आओ” गाकर स्मृतियों को जीवंत किया।
मास्टर सार्थक दुबे (विशेष आकर्षण): नन्हे कलाकार सार्थक ने “गुलाबी आंखें” प्रस्तुत कर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।
इसके अलावा अथर्व मिश्रा, सतीश मिश्रा, अनिल शुक्ला, माही तिवारी एवं नवीन मिश्रा सहित अनेक स्थानीय कलाकारों ने भी अपनी प्रस्तुतियां दीं।
संचालन एवं आभार
कार्यक्रम का कुशल एवं प्रभावशाली संचालन श्रीमती सुषमा पांडे तथा अवनीश शर्मा द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, कलाकारों और संगीत प्रेमियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मोहम्मद रफी साहब केवल एक गायक नहीं, बल्कि भारतीय संगीत की अमूल्य धरोहर हैं। उनकी सुरीली आवाज़ युगों-युगों तक संगीत प्रेमियों के दिलों में गूंजती रहेगी।


