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नारी शक्ति वंदन अधिनियम संशोधन न होने पर निराशा, महिलाओं के अधिकारों पर उठे सवाल

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बोडला। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के प्रस्तावित संशोधन के पारित न हो पाने पर महिला सशक्तिकरण को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में निराशा व्यक्त की जा रही है। इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा की मंडल अध्यक्ष श्रीमती विद्या श्रीवास ने गहरी चिंता जताई है।
उन्होंने कहा कि यह स्थिति बेहद निराशाजनक है, क्योंकि यह अधिनियम देश की करोड़ों महिलाओं के सपनों और उनके अधिकारों से सीधे जुड़ा हुआ था। उनके अनुसार, यह केवल एक कानून नहीं, बल्कि संसद में महिलाओं की बराबरी सुनिश्चित करने का एक ऐतिहासिक अवसर था, जिसे गंवा दिया गया।
श्रीमती श्रीवास ने सभी राजनीतिक दलों से अपील करते हुए कहा कि नारी सम्मान और सशक्तिकरण जैसे विषयों पर राजनीति से ऊपर उठकर एकजुटता दिखानी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक संसद में महिलाओं की भागीदारी नहीं बढ़ेगी, तब तक बड़े निर्णयों में आधी आबादी की प्रभावी भागीदारी संभव नहीं हो पाएगी।
उन्होंने आगे कहा कि यह मुद्दा केवल वर्तमान का नहीं, बल्कि देश के भविष्य से जुड़ा हुआ है। महिलाओं को उनके लोकतांत्रिक अधिकार दिलाने के लिए यह संघर्ष जारी रहेगा।
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम के संशोधन को पारित न होने देना उनकी महिला विरोधी सोच को उजागर करता है। उनके अनुसार, यह कानून केवल दिखावे तक सीमित रहा और वास्तविकता में महिलाओं को अधिकार देने की मंशा स्पष्ट नहीं दिखी।
अंत में उन्होंने कहा कि आज की नारी जागरूक है और अपने अधिकारों के प्रति सजग है। वह अपने हक के लिए संघर्ष करना जानती है और यह लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।

मुकेश अवस्थी

प्रधान संपादक

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