कवर्धामध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़

बोड़ला नगर पंचायत में विकास के नाम पर ‘डाका’: रात के अंधेरे में मोबाइल का टॉर्च जलाकर ढाला जा रहा भ्रष्टाचार का मसाला

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के गृह जिले में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता तार-तार; करोड़ों का बजट ठेकेदारों के लिए बना ‘दुधारू गाय’


वार्ड 10 की नाली निर्माण में भारी धांधली: घटिया सरिया और अमानक मटेरियल का इस्तेमाल, शिकायत के बाद SDM ने रुकवाया काम

बोड़ला – राज्य सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधि कबीरधाम जिले के बोड़ला नगर पंचायत की सूरत बदलने के लिए दिल खोलकर बजट बांट रहे हैं। उपमुख्यमंत्री व गृहमंत्री विजय शर्मा के लगातार प्रयासों से करोड़ों रुपये की स्वीकृति तो मिल रही है, लेकिन प्रशासनिक अनदेखी और ठेकेदारों की नीयत के चलते धरातल पर विकास ‘वेंटिलेटर’ पर है। निर्माण कार्यों का स्तर देखकर साफ जाहिर है कि बोड़ला नगर पंचायत ठेकेदारों के लिए ‘सोने का अंडा देने वाली मुर्गी’ बन चुकी है, जहां विकास के नाम पर शासकीय राशि का सरेआम बंदरबांट जारी है।


अंधेरे में मोबाइल के टॉर्च की रोशनी में ‘कमीशन’ का खेल
भ्रष्टाचार का सबसे ताजा और चौंकाने वाला मामला वार्ड क्रमांक 10 में देखने को मिला। यहां मंगल भवन से जल संसाधन विभाग की ओर बन रही नाली निर्माण में गुणवत्ता की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। हद तो तब हो गई जब ठेकेदार द्वारा रात के सन्नाटे में मोबाइल की टॉर्च जलाकर घटिया स्तर का कंक्रीटीकरण कराया जा रहा था। जब इस काले कारनामे की भनक बोड़ला एसडीएम को लगी, तो उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्परता दिखाई और नगर पंचायत सीएमओ को रात्रिकालीन निर्माण कार्य तत्काल प्रभाव से बंद कराने के कड़े निर्देश दिए।
उधारी के इंजीनियर, बेखौफ ठेकेदार
वार्डवासियों का आरोप है कि नाली निर्माण में एस्टीमेट के विपरीत बेहद घटिया सरिया और अमानक सीमेंट-रेत के मिश्रण का इस्तेमाल हो रहा है। नगर पंचायत में स्थायी और जिम्मेदार तकनीकी स्टाफ के अभाव में ‘उधारी के इंजीनियरों’ के भरोसे पूरा काम चल रहा है, जिससे ठेकेदारों के हौसले बुलंद हैं।
जनता में भारी आक्रोश, उच्चस्तरीय जांच की मांग
सरकारी खजाने की इस लूट से स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

नगरवासियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय तकनीकी जांच की मांग की है।
​बड़ा सवाल:
जब उपमुख्यमंत्री स्वयं क्षेत्र के विकास के लिए कटिबद्ध हैं, तब उनके ही गृह जिले में अधिकारी और ठेकेदार इतनी बेखौफ धांधली करने की हिम्मत कैसे जुटा रहे हैं?

मुकेश अवस्थी

प्रधान संपादक

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