मंचों पर ‘अन्नदाता’ का सम्मान, ज़मीन पर घुटनों के बल प्रशासन!

बोड़ला: आदिमजाति सेवा सहकारी कार्यालय के सामने अव्यवस्था का अंबार; ठेकेदार की मनमानी के आगे नतमस्तक हुआ सिस्टम, जान जोखिम में डालकर खाद ढोने को मजबूर किसान
बोड़ला।
कहते हैं देश का विकास किसानों के कंधों पर टिका है, लेकिन आज बोड़ला के आदिमजाति सेवा सहकारी समिति (वार्ड नंबर 10) में किसानों को खुद अपने कंधों पर भारी-भरकम खाद की बोरियां लादकर ‘मौत के कुएं’ जैसी स्थिति से गुजरना पड़ रहा है। खेती-किसानी का पीक सीजन शुरू हो चुका है। खेतों में पसीना बहाने वाला किसान आज खाद-यूरिया के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहा है, लेकिन यहाँ का प्रशासनिक अमला और ठेकेदार मिलकर किसानों की पीठ पर दोहरी मार मार रहे हैं।
ठेकेदार की सहूलियत सर्वोपरि, किसान की जान की कोई कीमत नहीं?
सहकारी कार्यालय के ठीक सामने नाली निर्माण का कार्य चल रहा है। हैरान करने वाली बात यह है कि यह निर्माण कार्य किसानों की सुविधा को ध्यान में रखकर नहीं, बल्कि सीधे तौर पर ठेकेदार की सहूलियत और मर्जी के मुताबिक किया जा रहा है। हालात देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि मानो इस रसूखदार ठेकेदार के आगे पूरा प्रशासनिक अमला बौना साबित हो चुका है।
बड़ा सवाल: क्या प्रशासन को यह समझ नहीं आया कि खेती का सीजन आ चुका है और इस वक्त सहकारी कार्यालय के पास सबसे ज्यादा भीड़ होगी? क्या इस हिस्से का निर्माण प्राथमिकता के आधार पर पहले पूरा नहीं किया जा सकता था, ताकि किसानों को सुचारू रास्ता मिल सके?
सिर पर 50 किलो का वजन और पैरों के नीचे मौत का गड्ढा
वर्तमान में स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि किसानों को गोदाम से यूरिया और खाद की भारी बोरियां अपने सिर और कंधों पर लादकर मुख्य सड़क तक लाना पड़ रहा है। बीच में खुदी हुई अधूरी नाली किसी बड़े हादसे को खुला निमंत्रण दे रही है।
भारी वजन के साथ उस गहरी नाली को लांघना किसी खतरे से कम नहीं है। अगर इस दौरान किसी किसान का पैर फिसला या संतुलन बिगड़ा, तो किसी भी अप्रिय घटना से इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन अफ़सोस, अन्नदाता की इस जानलेवा जद्दोजहद को देखने के बाद भी जिम्मेदार मूकदर्शक बने बैठे थे।

पत्रकार के सवालों के बाद जागा प्रशासन, CMO ने दिए कड़े निर्देश
किसानों की इस बेहद गंभीर और जानलेवा समस्या को लेकर जब पत्रकार द्वारा मुख्य नगर पालिका अधिकारी प्रणव प्रधान से सवाल किए गए और धरातल की हकीकत से रूबरू कराया गया, तब जाकर सोया हुआ प्रशासन हरकत में आया। पत्रकार के सवालों के घेरे में आने के बाद सीएमओ ने मामले की गंभीरता को समझा और तत्काल ठेकेदार को फटकार लगाते हुए वैकल्पिक व्यवस्था करने का आदेश जारी किया।
“मामले की जानकारी मिलते ही ठेकेदार को तुरंत वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। किसानों को खाद और यूरिया ले जाने में कोई असुविधा नहीं होने दी जाएगी।”
— प्रणव प्रधान, मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO)
भाषणों में ‘अन्नदाता’, हकीकत में ‘लाचार’
नेताओं के भाषणों और सरकारी मंचों पर तो किसानों के हितों की बड़ी-बड़ी बातें की जाती हैं, लेकिन धरातल की हकीकत इन खोखले दावों की पोल खोल कर रख देती है। मंचों की चिंता और जमीनी हकीकत का यह अंतर बोड़ला के वार्ड नंबर 10 में साफ देखा जा सकता है, जहाँ ठेकेदार के मुनाफे के आगे किसान की पीड़ा को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।

अब देखना यह होगा कि मुख्य नगर पालिका अधिकारी के निर्देशों के बाद ठेकेदार कितनी जल्दी धरातल पर वैकल्पिक रास्ता तैयार करता है, या फिर कागजी निर्देशों की आड़ में किसान इसी तरह जान जोखिम में डालने को मजबूर रहेंगे




