कवर्धामध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी ग्राम पंचायत कोठार, उपसरपंच और पंचों ने खोला मोर्चा

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सरपंच और सरपंच पति पर फर्जी प्रस्ताव के जरिए लाखों के गबन का आरोप; ग्रामीणों में भारी आक्रोश


कोठार/कवर्धा:
कबीरधाम जिले के जनपद पंचायत कवर्धा अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत कोठार में इन दिनों विकास कार्य कागजों तक ही सिमट कर रह गए हैं। पंचायत के निर्वाचित उपसरपंच और पंचों ने सरपंच एवं सरपंच पति के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए भ्रष्टाचार और भारी अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए हैं। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि पंचायत में लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और दबंगई के बल पर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है।


बिना काम के राशि आहरण, चौक-चौराहों पर पसरा अंधेरा
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, मूलभूत मद की राशि का उपयोग गांव की साफ-सफाई और चौक-चौराहों पर लाइट व्यवस्था के लिए किया जाना था। कागजों में इसके नाम पर लाखों रुपए आहरित कर लिए गए हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके उलट है। गांव की गलियां गंदगी से बजबजा रही हैं और अधिकतर लाइटें बंद पड़ी हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि रात के समय गांव में अंधेरा पसरा रहता है, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में इसे ‘चकाचक’ दिखाया गया है।
सरपंच पति का हस्तक्षेप और ‘फर्जी’ प्रस्ताव का खेल
उपसरपंच एवं पंचों ने आरोप लगाया कि पंचायत के कामकाज में सरपंच पति का सीधा हस्तक्षेप है। निर्वाचित पंचों को बिना विश्वास में लिए और बिना किसी विधिवत बैठक के फर्जी प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं। बिना किसी कोटेशन के ही चहेते वेंडर और करीबियों के खातों में राशि ट्रांसफर की जा रही है। पंचों ने कहा कि जब वे कार्यों का रिकॉर्ड मांगते हैं, तो उन्हें गोलमोल जवाब दिया जाता है या रिकॉर्ड गायब होने की बात कही जाती है।
इन कार्यों में धांधली की शिकायत:
बोर खनन: खनन कार्य में भारी गड़बड़ी और संबंधित दस्तावेजों का न होना।
निर्माण कार्य: शासकीय भूमि पर प्रस्तावित कई कार्य लंबे समय से अधूरे हैं।
दस्तावेज गायब: महत्वपूर्ण फाइलों और रिकॉर्ड का पंचायत कार्यालय से नदारद होना।
“पंचायत में तानाशाही चल रही है। बिना पंचों की सहमति के फर्जी प्रस्ताव बनाकर राशि निकाली जा रही है। हमने इसकी लिखित शिकायत प्रशासन से की है और निष्पक्ष जांच की मांग की है।”
— प्रतिनिधि, उपसरपंच व पंचगण
आंदोलन की चेतावनी
विकास कार्यों की सुस्त रफ़्तार और भ्रष्टाचार को लेकर ग्रामीणों में गहरा रोष व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जिला प्रशासन और जनपद पंचायत के अधिकारियों ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर कार्रवाई नहीं की, तो वे कलेक्ट्रेट का घेराव करेंगे और उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

मुकेश अवस्थी

प्रधान संपादक

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