कवर्धामध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़

ग्राम पंचायत भीरा में नाली निर्माण में मानकों की अनदेखी, भ्रष्टाचार की बू

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बोड़ला – भीरा (कबीरधाम): ग्राम पंचायत भीरा में सरकारी धन की लूट का एक ऐसा मामला सामने आया है जहाँ भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए कायदे-कानूनों की धज्जियां उड़ा दी गईं। ₹8.36 लाख की लागत से बन रही नाली में जब ग्रामीणों ने अनियमितता की शिकायत की, तो जिम्मेदार अधिकारियों ने जाँच करने के बजाय ठेका एजेंसी को काम ‘रफा-दफा’ करने का मौका दे दिया।
जाँच का दिखावा और भ्रष्टाचार की ढाल
हैरानी की बात यह है कि जब इस घटिया निर्माण की जानकारी कार्यक्रम अधिकारी और इंजीनियर को दी गई, तब कार्य प्रगति पर था। तकनीकी तौर पर गड़बड़ी दिखने के बावजूद अधिकारियों ने काम रुकवाने के बजाय “जाँच करेंगे” का रटा-रटाया जवाब दिया। लेकिन हकीकत में जाँच की टीम पहुँचने से पहले ही आनन-फानन में निर्माण कार्य को पूर्ण (Finish) कर दिया गया, ताकि घटिया सरिया और खराब बेस कंक्रीट के नीचे दब जाए और सबूत मिटाया जा सके।


क्यों उठ रहे हैं मिलीभगत के सवाल?
स्वयं एजेंसी, स्वयं निर्णायक: चूँकि कार्य एजेंसी स्वयं ग्राम पंचायत है, इसलिए निगरानी की जिम्मेदारी तकनीकी सहायक और इंजीनियर की थी। जाँच से पहले काम का पूरा होना यह दर्शाता है कि इंजीनियर और पंचायत के बीच अंदरूनी सांठगांठ है।
सबूत मिटाने की जल्दी: नाली के बेस में सरिया की दूरी दो फीट से भी अधिक एवं मानकों से कई गुना दूरी पर थी और जमीन की सफाई भी नहीं की गई थी। इन कमियों को छिपाने के लिए ही कंक्रीट डालकर काम खत्म कर दिया गया।
लाखों का बंदरबांट: सूचना पटल के अनुसार सामग्री के लिए आवंटित ₹7.30 लाख का बड़ा हिस्सा गुणवत्ता के नाम पर बलि चढ़ा दिया गया है।


तकनीकी खामियां जो भविष्य में बनेंगी मुसीबत:
मजबूती शून्य: सरिया के जाल में इतनी दूरी है कि भारी वाहन या पानी के दबाव से नाली बीच से टूट जाएगी।
जल्द आएगी दरार: मिट्टी और कचरे के ऊपर कंक्रीट डालने के कारण जमीन और स्लैब के बीच पकड़ नहीं बनी है।
सरकारी धन की बर्बादी: बिना उचित ‘कवर ब्लॉक’ और सही ‘ग्रेड’ के कंक्रीट के, यह नाली अपनी अनुमानित उम्र का 10% समय भी नहीं निकाल पाएगी।
ग्रामीणों का आक्रोश और मुख्य सवाल:
क्या इंजीनियर और अधिकारी ने जानबूझकर ठेकेदार/पंचायत को सबूत छिपाने का समय दिया?
जाँच से पहले ही कार्य पूर्ण कैसे मान लिया गया?
क्या जिला प्रशासन इस ‘दबाए गए’ भ्रष्टाचार की खुदाई करवाकर वास्तविक गुणवत्ता की जाँच कराएगा?
ग्राम पंचायत भीरा का यह मामला केवल एक नाली निर्माण नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का एक संगठित मॉडल है। ग्रामीणों ने अब जिला कलेक्टर और उच्चाधिकारियों से मांग की है कि इस कार्य का ‘क्वालिटी ऑडिट’ कराया जाए और दोषियों पर गबन का मामला दर्ज हो।
भीरा की जनता पूछ रही है—साहब, जाँच होने वाली थी या खेल होने वाला था?

मुकेश अवस्थी

प्रधान संपादक

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