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टैंकर पर फोटो और वाहवाही, जमीनी हकीकत में प्यास कायम: कुंडापानी के बैगा परिवार अब भी 6 किमी पानी ढोने को मजबूर

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पंडरिया – उत्कृष्ट विधायक भावना बोहरा ने क्षेत्र के वनांचल इलाकों में जल संकट दूर करने के लिए विधायक निधि द्वारा 11 ग्राम पंचायतों में 10 पानी टैंकर उपलब्ध कराए गए थे। इन टैंकरों पर बड़े अक्षरों में “विधायक भावना बोहरा द्वारा विधायक निधि से प्रदत्त” लिखा हुआ है, साथ ही टैंकरों पर विधायक की फोटो भी लगाई गई थी।


25 मई 2025 को स्वयं विधायक ने फेसबुक पर पोस्ट कर बैगा आदिवासी परिवारों की पीड़ा का जिक्र किया था और पानी टैंकर उपलब्ध कराने को बड़ी राहत बताया था, जिसे लेकर खूब वाहवाही भी बटोरी गई। दावा किया गया था कि इससे ग्रामीणों के घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचेगा और झिरिया के अशुद्ध पानी से होने वाले रोगों से मुक्ति मिलेगी। नीचे फेसबुक का पोस्ट है।


लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल उलट नजर आ रही है।
जनपद पंचायत पंडरिया अंतर्गत बिरहुलडीह ग्राम पंचायत के आश्रित ग्राम कुंडापानी में आज भी स्थिति नहीं बदली है। लगभग 200 की आबादी वाले इस बैगा बहुल गांव में लोग आज भी रोज़ाना करीब 6 किलोमीटर का जोखिम भरा सफर तय कर पानी लाने को मजबूर हैं।
ग्रामीण बताते हैं कि उन्हें 3 किलोमीटर नीचे घाटी में उतरकर “आमाचुआ” और “उमरझोरी” जैसे झिरिया से पानी लाना पड़ता है और फिर भरी मटकी लेकर खड़ी चढ़ाई चढ़नी पड़ती है। यह संघर्ष आज भी जारी है।


गांव में हेडपंप लगा है, लेकिन पानी नहीं निकलता। पानी टंकी बनी है, पर वह वर्षों से बंद पड़ी है और केवल शोपीस बनकर रह गई है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब टैंकर दिए गए, संवेदनाएं व्यक्त की गईं और प्रचार-प्रसार भी हुआ, तो इन टैंकरों की उपयोगिता पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया? जमीनी स्तर पर निगरानी क्यों नही की जा रही है?

निर्माण कार्यों पर उपयोग

स्थानीय लोगों का आरोप है कि ये टैंकर पेयजल आपूर्ति के बजाय कई जगह निर्माण कार्यों में अधिक नजर आते हैं और आम जनता के लिए सिर्फ प्रचार का माध्यम बनकर रह गए हैं।
अगर टैंकरों का सही उपयोग होता, तो कुंडापानी जैसे गांवों के लोगों को आज भी अपनी जान जोखिम में डालकर पानी ढोने की मजबूरी नहीं होती।
यह पूरा मामला न केवल योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कागजों और सोशल मीडिया की तस्वीरें जमीनी सच्चाई से कितनी दूर हैं।
मांग:
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि टैंकरों का वास्तविक उपयोग सुनिश्चित किया जाए, बंद पड़े हेडपंप को सुधारा जाए और पानी टंकी को चालू किया जाए, ताकि उन्हें इस रोज़ाना की कठिन परीक्षा से राहत मिल सके।

मुकेश अवस्थी

प्रधान संपादक

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